नक्सलमुक्त बस्तर में विकास की नई धारा- बैंकिंग विस्तार से मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था
31 नई बैंक शाखाओं के साथ बस्तर में आर्थिक सशक्तिकरण का नया अध्याय
सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक
(जनसंपर्क संचालनालय)
रायपुर, 07 मई 2026/एक समय नक्सल हिंसा और विकास की चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाला बस्तर अब बदल चुका है। आज बस्तर शांति, विश्वास, सुशासन और विकास की नई पहचान बन रहा है। नक्सलमुक्त होते बस्तर में अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, इंटरनेट और बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से विस्तार पा रही हैं। कभी बैंकिंग सुविधाओं के अभाव, नकदी आधारित अर्थव्यवस्था और सीमित वित्तीय पहुंच के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर संभाग में अब परिवर्तन की नई कहानी लिखी जा रही है। इसी परिवर्तन का सबसे मजबूत उदाहरण है पिछले ढाई वर्षों में बस्तर संभाग में 31 नई बैंक शाखाओं का खुलना। श्री विष्णु देव साय की सरकार के गठन के बाद बस्तर में बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार को नई गति मिली है। दूरस्थ और पूर्व में प्रभावित रहे क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच ने यह साबित किया है कि अब बस्तर विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह नया बस्तर है, जहां बंदूक की आवाज नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और समृद्धि की नई गूंज सुनाई दे रही है।
बैंक शाखाएं नहीं, विकास के नए द्वार
दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में बैंक शाखाओं की स्थापना ग्रामीण जीवन में व्यापक बदलाव लेकर आ रही है। पहले लोगों को छोटी-छोटी बैंकिंग जरूरतों के लिए जिला मुख्यालय या अन्य कस्बों तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। कई गांवों के लोगों को पूरा दिन खर्च कर बैंक पहुंचना पड़ता था। अब गांवों और ब्लॉक स्तर तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचने से न केवल समय और संसाधनों की बचत हो रही है, बल्कि लोगों का औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जुड़ाव भी बढ़ रहा है, इससे शासन की योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों के खातों में पहुंच रहा है और पारदर्शिता मजबूत हुई है।
बैंकिंग नेटवर्क बना नए बस्तर की पहचान
बस्तर संभाग के गांवों और कस्बों में बैंक शाखाओं का खुलना केवल वित्तीय संस्थाओं का विस्तार नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश का प्रतीक है। जिन क्षेत्रों में कभी मूलभूत सेवाएं पहुंचाना चुनौती माना जाता था, वहां आज आधुनिक बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। पिछले ढाई वर्षों में बस्तर संभाग में 31 नई बैंक शाखाएं शुरू हुई हैं, इनमें बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाओं का विस्तार हुआ है। तर्रेम, जगरगुंडा, चिंतलनार, किस्टाराम, पामेड़, समलवार और कोहकामेटा जैसे क्षेत्रों में बैंक शाखाओं का खुलना विकास और विश्वास दोनों का प्रतीक बन गया है।
नक्सलमुक्त बस्तर में बढ़ा विश्वास
बस्तर में शांति और सुरक्षा का वातावरण मजबूत होने के साथ अब विकास कार्यों को नई गति मिली है। बैंक शाखाओं का विस्तार यह दर्शाता है कि अब शासन और जनता के बीच विश्वास पहले से अधिक मजबूत हुआ है। जहां कभी लोगों को बैंकिंग कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब गांवों और ब्लॉक स्तर पर ही बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। इससे आम नागरिकों का जीवन आसान हुआ है और वे औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से तेजी से जुड़ रहे हैं। आज बस्तर के ग्रामीण बैंक खातों, डिजिटल भुगतान, किसान कृषि ऋण, बीमा, पेंशन और स्वरोजगार योजनाओं का लाभ आसानी से ले पा रहे हैं, इससे आर्थिक गतिविधियों में पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता दोनों बढ़ी हैं।
आदिवासी अंचलों को मिला आर्थिक संबल
बस्तर संभाग की बड़ी आबादी आदिवासी समुदाय की है। बैंकिंग नेटवर्क के विस्तार से आदिवासी परिवारों को अब सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे योजनाओं को लाभ सीधे हितग्राहियों के खाते में (डी बीटी के माध्यम) मिल रहा है। प्रधानमंत्री जनधन योजना, किसान सम्मान निधि, तेंदूपत्ता बोनस, वन धन योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अन्य डीबीटी के माध्यम से योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है, इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और पारदर्शी व्यवस्था मजबूत हुई है। महिला स्व-सहायता समूहों को भी बैंकिंग सुविधाओं से बड़ी लाभ मिली है। समूहों को ऋण सुविधा मिलने से आजीविका गतिविधियों और छोटे उद्यमों को नई गति मिली है।



