बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने रायपुर नगर निगम में सहायक लेखा अधिकारी पद पर हुई पदोन्नतियों को वैध ठहराते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने रिट अपील क्रमांक 630/2026 स्वीकार करते हुए सिंगल बेंच के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही सहायक लेखा अधिकारी के पद पर बमशंकर गुप्ता, आनंद ताम्रकार और राजकुमार कुर्रे की पदोन्नति को वैध माना गया।
न्यायालय ने भारतेश नेताम द्वारा दायर याचिका को गुण-दोष के आधार पर खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सहायक लेखा अधिकारी पद पर पदोन्नति के लिए अकाउंटेंट ट्रेनिंग उत्तीर्ण करने के बाद पांच वर्ष का अनुभव ही मान्य होगा। केवल सामान्य सेवा अवधि के आधार पर पदोन्नति की पात्रता नहीं बनती।
प्रकरण छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम भर्ती एवं सेवा शर्त नियम, 2018 (संशोधित 2021) के तहत नगर निगम रायपुर द्वारा विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की अनुशंसा पर की गई पदोन्नतियों से जुड़ा था। इन पदोन्नतियों को चुनौती देते हुए भारतेश नेताम ने याचिका दायर की थी, जिस पर सिंगल बेंच ने पूर्व में पदोन्नति आदेश निरस्त कर नई डीपीसी कराने के निर्देश दिए थे।
इस आदेश के खिलाफ वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तिवारी एवं अधिवक्ता वरुण अग्रवाल की ओर से रिट अपील दायर की गई। अपील में तर्क दिया गया कि नियमों के अनुसार असिस्टेंट ग्रेड-2 एकीकृत श्रेणी है और आवश्यक पांच वर्ष का अनुभव अकाउंटेंट ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ही गिना जाएगा।
डिवीजन बेंच ने रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए पाया कि भारतेश नेताम ने 8 सितंबर 2022 को अकाउंटेंट ट्रेनिंग उत्तीर्ण की थी। ऐसे में 14 जनवरी 2025 को आयोजित डीपीसी की तिथि तक उनके पास प्रशिक्षण उपरांत आवश्यक पांच वर्ष का अनुभव उपलब्ध नहीं था। इसी आधार पर न्यायालय ने उनकी याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और 17 जनवरी 2025 को जारी पदोन्नति आदेश को पूरी तरह वैध घोषित कर दिया।
इस फैसले को नगर निगमों में पदोन्नति संबंधी नियमों की स्पष्ट व्याख्या करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जिससे भविष्य में विभागीय पदोन्नतियों के मामलों में प्रशिक्षण उपरांत अनुभव की गणना को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट हो गई है।



