जल संरक्षण, पर्यावरण, जैविक खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका एवं सुशासन पर दिया विशेष जोर
गंभीरता, जवाबदेही और समन्वय के साथ योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश
राज्यपाल ने रायगढ़ में जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारियों से की चर्चा
रायपुर, जुलाई 2026/ प्रदेश के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने अपने दो दिवसीय रायगढ़ प्रवास के प्रथम दिवस जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारियों से चर्चा कर शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी ली। जिला कलेक्टोरेट में आयोजित बैठक में उन्होंने जल संरक्षण, पौधारोपण, पर्यावरण संवर्धन, जैविक कृषि, स्वच्छता, योग, टीबी उन्मूलन, आजीविका, सहकारिता, सड़क सुरक्षा सहित बीस से अधिक बिन्दुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिकारियों को पूरी गंभीरता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचे। इसके लिए सभी विभाग आपसी समन्वय स्थापित कर जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य करें। बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ.सी.आर.प्रसन्ना, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह विशेष रूप से उपस्थित थे।
जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर दिया जोर
राज्यपाल श्री डेका ने जिले में जल संरक्षण एवं जल संचयन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी लेते हुए कहा कि वर्षा जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने अन्य राज्यों असम, त्रिपुरा एवं छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिला में जल संरक्षण के लिए किये जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए वर्षा जल संग्रहण, वाटर हार्वेस्टिंग तथा जल स्रोतों के संरक्षण के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही पुराने कुओं, बावड़ियों तथा अन्य पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाया जाए, जिससे भू-जल स्तर में स्थायी सुधार हो सके।
’एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने के निर्देश
राज्यपाल श्री डेका ने जिले में चल रहे पौधारोपण अभियान की समीक्षा करते हुए विशेष रूप से अमृत सरोवर परिसरों में लगाए गए पौधों की संख्या एवं उनकी वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि पौधारोपण केवल संख्या बढ़ाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का दीर्घकालीन संकल्प है। उन्होंने एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत प्रत्येक नागरिक को कम से कम एक पौधा लगाने के लिए प्रेरित करने तथा विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं अन्य सार्वजनिक परिसरों में व्यापक पौधारोपण सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में बताया गया कि जिले की औद्योगिक इकाइयों के सहयोग से 10 हजार पीपल के पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिन्हें आमजन तक पहुंचाकर रोपित कराया जाएगा। राज्यपाल ने सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने और मृदा की प्रकृति के अनुरूप पौधारोपण एवं जल संरक्षण की समेकित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
जैविक खेती एवं फसल विविधीकरण से बढ़े किसानों की आय
राज्यपाल श्री डेका ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी लेते हुए रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए जीवामृत, कम्पोस्ट, ग्रीन मैन्योर, मदर कल्चर एवं ब्लू-ग्रीन तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। साथ ही विभिन्न जैविक एवं औषधीय फसलों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने बड़े किसानों को खेती के साथ डबरी निर्माण एवं मत्स्य पालन अपनाने के लिए प्रेरित करने को कहा, ताकि कृषि आय के अतिरिक्त आय के अन्य स्रोत भी विकसित हो सकें। उन्होंने धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं अन्य लाभकारी फसलों को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष जोर दिया।



